रवीना की शादी को कुछ महीने ही बीते थे। उसका ससुराल संयुक्त था लेकिन वो तभी भी अपने को अकेला ही महसूस करती थी।ऐसा नहीं था कि वो सब के साथ प्यार से नहीं रहती थी।बल्कि वह वो इस परिवार को जोड़ के प्यार से सहज के रखने की कोशिश करती थी। उसको यही लगता था कि मैं अपने घर को प्यार से कैसे सहजु। वो अपने घर में चहकती रहती थी, घर में हर सदस्य से वो मजाक,बातचित सबका ध्यान रखती थीं। वो अपनी खुशी से ज्यादा दूसरों की खुशी का ख्याल रखती थीं ,उसकी यही कोशिश रहती थी कि सब लोग खुश रहें😊 लेकिन जब वह घर में यह देखती थी कि घर के कुछ लोग उससे प्यार से पेश नहीं आते थे, बात नहीं करते थे तो वो यहीं सोचती थी कि" मुझसे क़ोई ग़लती तो नहीं हुईं"? पर जब वो आये दिन अपने साथ ये सब देखती थी तो वो कठोर बन गई और सबके एक्सप्रेशन को नजरंदाज करती रही, और अपने अंदर दुःख को छुपाकर सबसे प्यार से रहती थी।
ऐसे में अगर उसका साथ देते थे तो वो उसके पति थे।
उसको बस यहीं संतुष्टि होती थी की कोई साथ हो या न हो , वो शख्स साथ जरूर है जिसके पीछे वो अपने घर, माँ- बाप को छोड़ कर आईं हैं।
लड़कियों को यही चाहिये अगर उसके पति उनके साथ हो तो उनके जीवन में कैसा भी दुःख हो वो हस्ती रहती हैं।,,,😊
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